लाल किताब के उपाय

किंवदंती है कि लंकाधिपति रावण ने सूर्य के सारथि अरुण से इस इल्म का सामुद्रिक ज्ञान संस्कृत में ग्रंथ के रूप में ग्रहण किया था। रावण की तिलिस्मी दुनिया समाप्त होने के पश्चात् यह ग्रंथ किसी प्रकार आद नामक एक स्थान पर पहुंच गया जहां इसका अनुवाद अरबी और फारसी भाषा में किया गया।

आज भी कुछ लोग मानते हैं कि यह पुस्तक फारसी में उपलब्ध है जबकि सच्चाई कुछ और है यह ग्रंथ उर्दू अनुवाद में पाकिस्तान के पुस्तकालय में सुरक्षित है। लेकिन काल वश इस ग्रंथ अरुण संहिता बनाम लाल किताब का कुछ हिस्सा लुप्त चुका है। इसका तात्पर्य यह है कि लाल किताब कोई जादू नहीं है अपितु बचाव व रूह शांति के उपायों का एक माध्यम है।

लाल किताब के आधार पर विशेष नियम

  • टेवे में जो ग्रह उच्च का या अपने घर का हो, उस ग्रह की वस्तुएं कभी दान नहीं करनी चाहिए।
  • चंद्रमा यदि खाना नं. 2 या 4 में हो तो चंद्रमा की वस्तुएं दूध, चावल, मोती का दान कभी नहीं करना चाहिए।
  • मंगल टेवे में श्रेष्ठ हो या उच्च हो तो व्यक्ति को मिठाई का दान कभी नहीं करना चाहिए।
  • सूर्य यदि टेवे में उत्तम हो तो गुड़ या गेहूं का दान करना टेवे वाले के लिए वर्जित है।
  • बुध यदि टेवे में श्रेष्ठ हो तो मूंग साबुत, हरा कपड़ा, कलम, खुब तथा घड़ा आदि दान नहीं करना चाहिए ।
  • बृहस्पति शुभ व उच्च हो तो सोना, पीली वस्तुएं, केसर आदि का दान नहीं करना चाहिए।
  • शुक्र यदि टेवे में उच्च का हो या शुभ हो तो सिले हुए कपड़े कभी दान नहीं करने चाहिए।
  • शनि यदि टेवे में उच्च हो तो शराब, मांस, अंडा तेल या लोहे आदि का दान नहीं करना चाहिए।

इसी प्रकार उपर लिखे ग्रह यदि टेवे में नीच हो या अशुभ हों तो उपरोक्त वस्तुएं ग्रहानुसार दान में या मुफ्त नहीं लेनी चाहिए।

मंदिर या धर्म स्थान से संबंधित नियम

जब किसी जातक के टेवे में खाना नं. 2 खाली हो और खाना नं. 8 में पापी ग्रह हों खासकर शनि तो इस टेवे वाले जातक को धर्म स्थान या मंदिर नहीं जाना चाहिए। मंदिर के बाहर से अपने इष्टदेव को नमस्कार करना चाहिए। टेवे के खाना नं. 6,8,12 में शत्रु ग्रह हों और खाना नं. 2 खाली हो तब भी मंदिर जाना वर्जित है।

धर्मार्थ कार्य करने से संबंधित नियम

1. यदि चंद्रमा खाना नं. 6 में हो व्यक्ति धर्मार्थ पानी का पम्प लगवाएं, कुंआ खुदवाए या उसकी मरम्मत करवाए तो दिन प्रतिदिन परिवार घटे ।

2. यदि शनि खाना नं. 8 में हो और व्यक्ति सराय, धर्मशाला या बेसहारों के लिए निवास स्थान बनाए खुद बेघर हो जाएगा।

3. यदि टेवे में शनि खाना नं. 1 में और बृहस्पति खाना नं. 5 में हो और टेवे वाला तांबे के पैसे या बर्तन दान करे तो संतान नष्ट होगी।

4. यदि टेवे में बृहस्पति खाना नं. 10 में और चंद्रमा 4 में हो और व्यक्ति पूजा स्थान का निर्माण करावे तो झूठे आरोपों में जेल यात्रा करेगा।

5. यदि टेवे में शुक्र खाना नं. 9 में हो और टेवे वाला अनाथ बच्चा गोद ले लेवे तो खुद की मिट्टी खराब।

6. यदि चंद्रमा खाना नं. 12 वाला जातक साधु को प्रतिदिन रोटी खिलाए, धर्मार्थ पाठशाला खोले तो अंतिम समय में कोई पानी देने वाला न होगा।

7. यदि बृहस्पति खाना नं. 7 वाला व्यक्ति किसी को नये वस्त्र दान देगा तो खुद निर्वस्त्र हो जाएगा।

8. यदि सूर्य खाना नं. 7 या 8 में हो तो सुबह के समय और शाम के समय दिया दान जहर के सामान होगा।

औलाद संबंधी सावधानियां व उपाय

1. यदि बच्चे मरते हों या गर्भपात होते हों तो स्त्री के गर्भवती होते ही उसके बाजू पर लाल धागा बांध दे (स्त्री के कद से 1” ज्यादा) यही धागा संतान होने के पश्चात बच्चे को बांधे और माता को नया धागा बांध दें जो 11 महीने तक बांध कर रखें।

2. गणेश जी की अराधना करें।

3. गाय ग्रास मदद करेगा।

4. बच्चे के जनम से पहले एक बर्तन में दूध और दूसरे में खांड डालकर स्त्री का हाथ लगवा कर कायम करें तथा बच्चे के जन्म के बाद दोनों वस्तुएं धर्म स्थान में पहुंचा दें। जिस बर्तन में दोनों चीजें रखें उन्हें वापिस मत लाएं।

5. यदि वर्षफल में राहु मंदा हो तो जौ का पानी बोतल में भरकर औरत के सिरहाने रखें, पैदाइश आराम से होगी।

6. यदि 100 दिन से अधिक समय के लिए घर से बाहर जाना हो तो नदी पार करते समय तांबे के सिक्के पानी में फेंके।

7. दिन के समय मीठी तंदूरी रोटियां, जिन्हें लोहा न लगे, कुत्ते, दरवेश को खिलाएं।

8. यदि बच्चे पैदा होते ही मरते हों तो मीठी रोटीयों की जगह नमकीन रोटियां खिलाएं

9. धर्मस्थान में जन्में बालक की आयु लंबी होगी।

10. कुतिया का नर बच्चा जो अपने समय अकेला पैदा हुआ हो, रखने से (पालने से) परिवार में बरकत होगी।

लाल किताब के उपाय

शादी से संबंधित लाल किताब के नियम

लाल किताब के नियमानुसार शुक्र खाना नं. 9 में शादी के सुख के लिए अच्छा नहीं माना जाता बल्कि हलचल भरी शादी का कारण बनता है या स्थिति और भी खराब हो जाती जब शुक्र खाना नं. 9 वाले जातक के घर में आने का द्वार दक्षिण की ओर होता है।

उदाहरण के लिए भगवान राम के टेवे में शुक्र खाना नं. 9 में उच्च का होकर पड़ा है। जिस कुटिया से सीता का अपहरण हुआ उसका द्वार दक्षिण दिशा की ओर था।

1. अगर टेवे में सूर्य व शुक्र इकट्ठे हो तो व्यक्ति की शादी सूर्य की आयू (22 साल) या फिर शुक्र की आयु (25वें साल) में होती हैं तो तलाक या अलग होने का योग बनता है।

2. अगर टेवे में चंद्रमा खाना नं. 1 में हो तो चंद्रमा की आयु (25वें वर्ष) में शादी नहीं करनी चाहिए क्योंकि चंद्रमा खाना नं. 7 को देखता जो कि शुक्र का है और शुक्र व चंद्रमा में शत्रुता है।

3. अगर राहु टेवे के खाना नं. 7 में हो तो 21वें साल में की गई शादी दुर्भाग्यपूर्ण साबित होगी।

4. शनि टेवे के खाना नं. 6 में हो तथा शुक्र खाना नं. 2 या 12 में हों तो पत्नी / पति की आयु को खतरा बना रहे।

5. शुक्र टेवे में जिस खाने में हो, उससे अगले (दूसरे) या पिछले (बारहवे) खाने में अशुभ ग्रह हों तो तलाक की संभवना रहती है। बुध को लाल किताब में अशुभ ग्रह माना गया हैं

6. जिस व्यक्ति के टेवे में बुध खाना नं. 6 में हो उसे अपनी कन्या उत्तर दिशा में रहने वाले व्यक्ति को नहीं व्याहनी चाहिए वर्ना लड़की शादी के बाद दुःखी रहेगी।

7. जिस व्यक्ति के टेवे में चंद्रमा खाना नं. 11 में हो उसे अपनी लड़की का कन्यादान सूर्योदय के समय नहीं करना चाहिए वर्ना बाप बेटी दोनों दुःखी में रहे क्योंकि यह समय केतु से प्रभावित होता है।

8. सूर्य, राहु व बुध की युति टेवे में हो तो जातक की एक से अधिक शादियां होगी और सभी दुःखपूर्ण रहेंगी।

9. अगर सूर्य खाना नं. 6 में और शनि खाना नं. 12 में हो तब भी एक से अधिक शादियों की संभावना रहती है।

उपाय – ग्रहों की शांति व खुशहाल शादी के लिए नीचे लिखे उपाय, ग्रहों के अनुसार है। उपाय कन्या द्वारा किये जाने चाहिए।

1. यदि टेवे में बृहस्पति खराब हो तो शादी के वक्त कन्या को अपने माता पिता से सोने के दो चौकोर टुकड़े लेने चाहिए। एक अपने पास रखें और दूसरा पानी में बहाएं वजन कितना भी हो सकता है किसी कारण पास रखा टुकड़ा यदि खो जाए तो एक और टुकड़ा अपने मां-बाप से लेना चाहिए परंतु दूसरी बार पानी में बहाने की आवश्यकता नहीं।

2. यदि टेवे में सूर्य खराब हो तो सूर्य की धातू यानी तांबे के दो टुकड़ें उपरोक्त विधि से इस्तेमाल करने चाहिए।

3. यदि टेवे में चंद्रमा खराब हो तो उपरोक्त विधि द्वारा सुच्चे (2) मोतियों का इस्तेमाल करना चाहिए। किसी कारणवश मोती का मिल सकें तो ससुराल से लड़की के वजन के बराबर चावल या फिर चांदी के बर्तन में गंगाजल लेकर ससुराल में रखना चाहिए।

4. शुक्र के टेवे में खराब होने की अवस्था में सफेद रंग के दो मोतियों का उपरोक्त विधि से इस्तेमाल करें।

5. खराब मंगल के लिए लाल रंग के दो पत्थर के टुकड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन उन पत्थरों में चमक नहीं होनी चाहिए।

6. यदि टेवे में बुध खराब हो तो दो सीपीयों का उपरोक्त ढंग से इस्तेमाल करें।

7. खराब शनि के लिए स्टेनलेस स्टील के दो चौकोर टुकड़ों का या फिर सुरमें की डालियों का उपयोग करें।

8. यदि टेवे में राहु खराब हो तो चंद्रमा की मदद लें या फिर चांदी के दो टुकड़ों वाला उपाय करें। दुल्हे को अपने ससुराल वालों में नीलम किसी भी शक्ल में लेना मना है।

9. केतु के खराब होने पर बृहस्पति की वस्तु यानि सोने के टुकड़ों का उपाय किया जाए।

इसके अलावा निम्नलिखित उपाय भी करें :-

1. जिस ‘पुरूष की कुंडली में शुक्र खाना नं. 6 में हो उसके ससुराल वालों को चाहिए कि सोने का क्लिप अपनी लड़की को देवें ।

2. यदि शुक्र खाना नं. 4 में हो या सूर्य, राहु चंद्र खाना नं. 2 में या फिर राहु खाना नं. 15 या 7 में हो (पुरुष के टेवे में) ऐसे में जातक का चांदी का चौकोर टुकड़ा ससुराल वाले से लेकर हमेशा अपने पास रखना चाहिए।

3. यदि टेवे में केतु खाना नं. 8 में हो तो शादी के तुरंत बाद व्यक्ति को काला सफेद कंबल धर्म स्थान में रखना चाहिए।

4. यदि चंद्रमा खाना नं. 6 में हो तो कुंडली में पितृदोष बनता है ऐसे में व्यक्ति को दिन के समय 100 कुत्तों को मीठी रोटी, शादी के तुरंत बाद डालनी चाहिए।

5. यदि बुध टेवे के खाना नं. 12 में हो तो स्टेनलेस स्टील के बिना जोड़ दो छल्ले बनवाने चाहिए जिनमें से एक शादी के समय धारण करना चाहिए और दूसरा पानी में बहाना चाहिए (ढंग सहित)

कुछ विशेष उपाय

1. खाना नं. 6 व खाना नं. 10 के कुप्रभाव को बचाने के लिए टेवे का खाना नं. 5 देखें वहां बैठे ग्रह के शत्रु ग्रह की चीज़े ज़मीन के नीचे दबाएं।

2. बृहस्पति खाना नं. 10 में शुक्र खाना नं. 11 में केतु खाना नं. 8 में और शनि खाना नं. 5 में हो बेटे के वजन के बराबर आटे की रोटियां 25 से 48 दिन तक कुत्तों को खिलाएं।

3. खाना नं. 2 और खाना नं. 12 में लाभदायक ग्रह हों तो षठस्थ ग्रह को जगाएं इसके लिए अपने मामा या अपनी बेटीयों की सहायता और सेवा करें।

4. वर्षफल में जो ग्रह षष्ठ में आए वह जातक के स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है उस ग्रह से संबंधित वस्तुएं दान में देनी चाहिए।

5. जन्म कुंडली के खाना नं. 11 में जो ग्रह हो और वर्षफल में खाना नं. 11 या 8 में आए तो उस ग्रह की कारक वस्तुएं मत खरीदें।

6. यदि खाना नं. 3 और 5 खाली हों तो खाना नं. 2 के माध्यम से खाना नं. 9 को जगाना चाहिए।

7. यदि खाना नं. 10 खाली हो तो खाना नं. 4 के ग्रह चाहे अच्छे भी जो फल नहीं देते इसके लिए 10 अंधों को भोजन खिलाएं पर भोजन के लिए पैसे न दें।

8. खाना नं. 11 में स्थित सूर्य तब तक शुभ फल देता है जब तक व्यक्ति शाकाहारी रहे। यदि मांस, मदिरा का सेवन करे तो संतान के लिए अशुभ।

9. यदि टेवे में बृहस्पति और केतु शुभ हो तो खाना नं. 11 का चंद्रमा अति शुभ फल देता, कम से कम उस उम्र तक जब तक व्यक्ति की माता जीवित हैं।

10. यदि टेवे में बृहस्पति अशुभ फल रहा हो तो बेटी की शादी के समय सोने के 2 टुकड़े बराबर वजन के बनवा कर एक पानी में बहा दें और एक दुल्हन को दे दुल्हन उसे बेचे नहीं, सदा के लिए अपने पास रखे।

  • यदि सूर्य अशुभ फल दे तो तांबे के टुकड़ों का उपरोक्त ढंग से इस्तेमाल करें।
  • यदि चंद्रमा अशुभ फल दे तो मोती उपरोक्त ढंग से इस्तेमाल करें।
  • यदि मंगल अशुभ फल दे तो चमकीला लाल पत्थर इस्तेमाल करें।
  • यदि शनि अशुभ फल दे तो हीरे के टुकड़ों का उपरोक्त इस्तेमाल करें।
  • यदि राहु अशुभ फल दे तो लोहा या स्टील उपरोक्त ढंग से इस्तेमाल करें।
  • यदि केतु अशुभ फल दे तो 2 रंग का पत्थर लेकर उपरोक्त ढंग से इस्तेमाल करें।

11. खाना नं. 6 का शनि खुद चाहे अच्छे फल दे किंतु बृहस्पति के फल को खराब करता है इसलिए नारियल, अखरोट आदि पानी में बहाने चाहिए।

12. बृहस्पति खाना नं. 1 में हो और शनि खाना नं. 11 में हो तो गायों की सेवा करने से शुभ फल मिलता है।

13. बृहस्पति खाना नं. 3 में हो तो दुर्गापाठ शुभ फल देता है।

14. बृहस्पति खाना नं. 4 के समय खाना नं. 10 खाली हो तो गुरु सुप्त होता है ऐसे में व्यक्ति को दूसरों के सामने नंगे बदन नहीं घूमना चाहिए।

15. बृहस्पति खाना नं. 8 के समय दुर्भाग्यपूर्ण समय आए तो गुरु व शुक्र संबंधित वस्तुएं पूजालय में दान दें।

16. बृहस्पति खाना नं 10 और मंगल खाना नं. 4 में होने पर व्यक्ति मंगल से संबंधित रिश्तेदारों की सेवा व सहायता करें।

17. खाना नं. 2 का सूर्य घर की स्त्रियों के लिए अशुभ होता है ऐसे में शनि की वस्तुएं नारियल, नारियल का तेल या अखरोट धर्म स्थान में दें।

18. सूर्य खाना नं. 4 में और उसके मित्र ग्रह खाना नं. 10 में हो तो खाना नं. 5 में स्थित ग्रह अशुभ फल देंगे ऐसे में मंगल की वस्तुएं दान करें।

19. खाना नं. 6 का सूर्य यदि बच्चे या मामा आदि को हानि करे तो बंदर को गुड़, दीमक को गेहुं बाजरा डालें। खुद सूर्य के कुप्रभाव को दूर करने के लिए घर में नदी का जल रखें।

20. सूर्य खाना नं. 6 के समय यदि खाना नं. 3 खाली हो तो नौकरी या व्यापार में बाधाएं आती है ऐसे में कुत्तों को खाना खिलाना चाहिए।

21. सूर्य खाना नं. 6 के समय यदि मंगल खाना नं. 10 में हो तो बच्चों की सेहत के लिए अशुभ। ऐसे में चंद्र संबंधित वस्तुएं रात को तकिए के नीचे रखें और सुबह गरीबों में बांट देवें

22. सूर्य टेवे के खाना नं. 7 में हो तो इन बातों का ध्यान रखें किसी के प्रति दुर्व्यवहार न करें, गोचर का शनि लग्न में हो तो चंद्रमा निःस्सहाय हो जाता है, ऐसे में रात के खाने के बाद चूल्हे की आग दूध से बुझाएं और फिर उस चूल्हे का इस्तेमाल अगले दिन सूर्योदय के बाद करें। अगर बच्चों पर या आर्थिक स्थिति पर दुश्प्रभाव पड़ रहा हो तो ताम्बे के चौरस टुकड़े जमीन में दबाए या गुड़ खाकर बाद में पानी पीकर काम पर जाएं। भोजन करने से पहले भोजन का कुछ अंश आग में डालें लगातार करना चाहिए ।

23. सूर्य पर शनि की दृष्टि के कारण अशुभ फल महसूस हो तो व्यक्ति अपने घर की दक्षिणी दीवार की ओर जाए. पूर्व की ओर मुंह करके सीधा खड़ा होकर पानी से भरा घड़ा अपनी दाहिनी ओर गाड़ दें। घड़े का पानी 43 दिन तक सूखने न पाए।

24. बड़ों के पांव छूकर आर्शीवाद लेना हमेशा शुभ होता है। चंद्रमा की वस्तुएं दूध, दही बेचना परिवार के लिए हानिकारक चांदी, चावल, चश्मे का पानी घर में रखना शुभ रहे।

25. यदि टेवे में खाना नं. 7 खाली हो तो 24 वर्ष की आयु से पहले घर में गाय या नौकरानी रखना खाना नं. 7 को जगाना चाहिए वर्ना 25वें साल में चंद्रमा बुरा प्रभाव देगा।

26. यदि खाना नं. 4 का चंद्रमा बुरा प्रभाव देने लगे तथा टेवे में बुध खाना नं. 3 तथा बृहस्पति खाना नं. 9 में हो तो 43 दिन तक कन्याओं को हरे वस्त्र देने चाहिए।

27. यदि खाना नं. 4 का चंद्रमा के समय खाना नं. 9 खाली हो तो चंद्रमा सुप्त माना जाएगा। ऐसे व्यक्ति को उत्तम भोजन खाकर यात्रा पर चले जाना चाहिए। कुछ खाना साथ ले जाना चाहिए।

28. खाना नं. 6 को चंद्रमा के बुरे फल से बचने के लिए, मंगल, बृहस्पति व सूर्य की वस्तुएं दान करें। कभी-2 मंदिर जाए। सूर्यास्त के बाद दूध मत पीएं।

29. खाना नं. 8 का चंद्रमा कष्ट देने लगे तो शमशान के पंप / कुंए का पानी घर में स्थापित करें दूध का दान करें। बड़ों के पांव छुकर आशीर्वाद लें।

30 चंद्रमा खाना नं. 11 के समय यदि व्यक्ति की पत्नी बच्चों को जन्म देने वाली हो तो व्यक्ति की मां को कहीं बाहर चले जाना चहिए और 43 दिन पोते / पोती को ने देखे ।

31. खाना नं. 11 का चंद्रमा यदि मां का अनिष्ट कर रहा हो तो 121 पेड़े बच्चों में बांटने चाहिए। बच्चे न मिल सके तो पानी में बहा दें।

32. शुक्र खाना नं. 4 में हो तो दो विवाह होने की संभावना होती है, इसलिए व्यक्ति के अपनी पत्नी के साथ रस्मों रिवाज से दूसरी शादी कर लेनी चाहिए।

33. खाना नं. 4 का शुक्र व्यक्ति के परस्त्रीयों से कामुक संबंध बनवाता है जो कि परिवार के लिए कष्टकारी है। बृहस्पति की वस्तुएं पानी में बहाएं ।

34. जिस व्यक्ति के टेवे में शुक्र खाना नं. 6 में हो उसे मां-बाप की इकलौती संतान से शादी करनी चाहिए ।

35. शुक्र खाना नं. 6 के समय यदि बृहस्पति और मंगल के सिवा कोई और ग्रह शुक्र के साथ हो, इसी समय खाना नं. 2 खाली हो तो अनिष्टकारी होता है घर में कोई चांदी रखें, व्यक्ति की पत्नी फर्श पर नंगे पांव न चले, गुप्तांगों को दही से धोना चाहिए।

36. शुक्र खाना नं. 7 के समय यदि राहु खाना नं. 8 में हो तो अशुभ होता है। ऐसे व्यक्ति की पत्नी काले नीले रंग के कपड़े मत पहने ।

37. शुक्र खाना नं. 9 में हो तो धार्मिक स्थानों की यात्रा शुभ फल देती है। नीम के तने में छेद करके उसमें चांदी के चौकर टुकड़े दबाएं।

38. शुक्र खाना नं. 10 के समय संतानोत्पति के लिए अशुभ है व्यक्ति की पत्नी ज्यादा कामुक होती है पत्नी गुप्तांग दही से धोएं। यदि जातक खुद बिमार हो तो गोदान करे यदि रोग साध्य होगा तो ठीक हो जाए वर्ना मृत्यु शान्तीपूर्ण होगी।

39. शुक्र खाना नं. 12 में पत्नी के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है। ऐसे में स्त्री को संध्या के समय विरान जगह नीले फूल दबाने चाहिए ।

40. जब टेवे में मंगल बद हो तो हाथी दांत या हाथी के दांत से बनी चीजें घर में रखना शुभ फल देता है।

41. यदि खाना नं. 1 में मंगल नं. 3 में बुध व खाना नं. 7, 9, 11 खाली हों तो बृहस्पति की वस्तुएं घर में स्थापित करें, शुक्र के व्यवसाय करने से खाना नं. 7 जाग्रत होना, 39 वर्ष की आयु तक साधूओं की संगति न करें। 42. खाना नं. 4 का मंगल अशुभ फल देने लगे तो चंद्रमा की वस्तुएं अपनाएं यदि बच्चे न होते हों तो शहद से भरा घड़ा शमशान में दबाएं। लंबी बिमारी से बचने के लिए मृगछाला प्रयोग करें घर के दक्षिणी द्वार पर एक लोहे की कील गाड़ दें जो दिखाई न दे।

43. खाना नं. 5 का मंगल अशुभ फल दे जैसे बुरे सपने या नींद में विघ्न तो रात को सिरहाने पानी रखें और सुबह किसी पेड़ की जड़ में डाल दें (43) दिन लगातार ।

44. खाना नं. 6 का मंगल अशुभ फल दे तो या तो बच्चे का जन्म दिन मनाएं मत या फिर नमकीन भोजन खिलाएं जिनमें मीठाई शामिल न हो।

45. खाना नं. 7 का मंगल बुरे प्रभाव दे तो बचने के लिए कच्चे गोरे से दिवार बनाए और शाम को गिरादें (शनि का उपचार), जब बहन बेटी घर आए तो मीठाई खिलाएं बिना मत जाने दें।

46. खाना नं. 12 का मंगल अशुभ फल दे तो खाली कपड़े या टोपी का इस्तेमाल करें। सुबह के समय चीनी ‘घुला हुआ पानी सूर्य को अर्पित करें, मंगल, बुध व शनि की वस्तुएं मंदिर में दान करें।

47. बुध के बुरे प्रभाव को रोकने के लिए बिना जोड़ स्टील का छल्ला धारण करें बुध केतु का संबंध हो तो फिटकरी से दांत साफ करें। बकरी दान उत्तम उपाय है।

48. शनि खाना नं. 5 में अशुभ फल दे तो पैतृक धन में सूर्य की वस्तुएं (गुड़, पालतू बंदर) चंद्रमा की वस्तु (चांदी, चावल) व मंगल की वस्तु (शहद, मूंग) स्थापित करें।

49. खाना नं. 6 का शनि अशुभ फल दें तो पानी में नारियल, अखरोट बहाएं। बच्चों की समृद्धि के लिए सांप को दुध पिलाएं। हर प्रकार के कष्ट के निवारण के लिए मिट्टी के बर्तन में सरसों का तेल भरकर पानी के नीचे दबाएं।

50. खाना नं. 7 में शनि के दुष्प्रभावों से बचने के लिए अगर शनि सोया न हो तो काली बांसुरी में चीनी / शक्कर भर कर विरान जगह दबाएं, अगर शनि सोया हो तो मिट्टी के घड़े में शहद भरकर जमीन में दबाएं। 51. राहु का कुप्रभाव को रोकने के लिए

  • मानसिक शक्ति के लिए चंद्रमा का उपाय यानि चांदी धारण करें।
  • सुबह सवेरे मसूर की लाल दाल किसी सफाई करने वाले को दान करें।
  • बिमार आदमी के वजन के बराबर जौ बहते पानी में बहाएं ।
  • रात को सोते समय जौ किसी बर्तन में डालकर सिरहाने रखे और सुबह गरीबों में बांट दें।

लाल किताब और संतान सुख

लाल किताब के अनुसार संतान सुख दिलाने वाला ग्रह केतु माना जाता है। संतान एवं परिवार के सुख के लिए निम्न उपाय करने चाहिएं :-

  • प्रत्येक माह परिवार के सभी सदस्यों की संख्या और घर में आने वाले मेहमानों की संख्या से अधिक रोटियां बना कर पशुओं को खिला दें।
  • प्रतिदिन अपने भोजन में से तीन निवाले कुत्ते के लिए अवश्य निकाल देवें।
  • जहां भोजन बने वहीं बैठ कर खाएं।
  • संतान के जन्म से पहले किसी पात्र में दूध तथा शक्कर भर कर गर्भवती स्त्री का हाथ लगवा कर रख लें। संतान के जन्म के बाद इन पात्रों को धर्म स्थान में चढ़ा दें।
  • गणेश जी की आराधना करनी चाहिए।
  • गर्भवती स्त्री की दायीं भुजा में लाल धागा बांध देवें । यह धागा डेढ़ वर्ष तक बंधा रहने देवें। साथ ही गाय को प्रतिदिन रोटी खिलावें ।
  • रात को सोते समय सिरहाने जल से भरा पात्र रखें तथा प्रातः काल उसे पेड़-पौधों में डाल देवें ।
  • संतान की रक्षा के लिए सौ दिन या अधिक समय तक घर से बाहर जाना हो, तो नदी पार करते समय जल में तांबे का पैसा डालना चाहिए।
  • मीठी रोटियां बना कर कुत्तों को खिलाना चाहिए।
  • कुतिया का जन्मा मात्र एक नर बच्चा घर में रखने से कुल की वृद्धि होती है।
  • संतान न होने पर अपने भोजन का आधा भाग गाय को खिलायें और गाय की सेवा करें।
  • संतान के उत्तम स्वास्थ्य के लिए गाय को भोजन खिलायें।
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